प्रवर्तन निदेशालय ने बताया, माल्या ने कर्ज चुकाने का ऑफर दे चली ‘प्ली बार्गेन’ की चाल

Enforcement Directorate said, Mallya offered to repay the loan “Plei Bargain” moves

प्रवर्तन निदेशालय ने भगोड़ा घोषित शराब कारोबारी विजय माल्या का वह ऑफर ठुकरा दिया है, जिसमें माल्या ने कहा था कि उसकी संपत्ति बेचकर बैंकों का बकाया चुकाने का मौका दिया जाए। ईडी ने कहा कि यह ‘प्ली बार्गेन’ की कोशिश है। प्ली बार्गेन का कानूनी लिहाज से मतलब यह है कि किसी पर आरोप हो, तो वह अदालती सुनवाई शुरू होने से पहले अपना अपराध स्वीकार करता है ताकि अभियोजन पक्ष उसके साथ कुछ नरमी बरते। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि माल्या का ऑफर ठुकरा दिया गया है ताकि ब्रिटेन में उसके खिलाफ कानूनी मामला और पुख्ता हो सके।

अधिकारी ने कहा कि माल्या भगोड़ा है और भारत में उसकी मर्जी नहीं चलेगी। अधिकारी ने कहा कि जिन एसेट्स को बेचने की बात वह कर रहा है, वे अब उसके नाम नहीं हैं। एक सीनियर वकील ने कहा, ‘ब्रिटेन या अमेरिका की तरह ऐसा भारत में संभव नहीं है। अब मामला असल में अदालत के हाथ में है।’ अधिकारी ने कहा, ‘माल्या प्ली बार्गेन का ऑफर दे रहा है और कह रहा है कि वह बैंकों का बकाया चुकाना चाहता है और उसे उसकी एसेट्स बेचने की इजाजत दी जाए। यह सब भारत में नहीं चलेगा। मामला अब अदालत के पास है।’

लीगल फर्म एमजेडएम लीगल के मैनेजिंग पार्टनर जुल्फीकार एम मेमन ने कहा, ‘हमारा देश कई इकनॉमिक फ्रॉड का सामना कर रहा है। ऐसे में एक प्ली बार्गेन को स्वीकार करने का मतलब दूसरे आरोपियों की ओर से ऐसे ही अनुरोधों को दावत देने जैसा होगा। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।’ ईडी के अधिकारियों ने माल्या का यह दावा खारिज कर दिया है कि इस रेग्युलेटरी एजेंसी ने उसकी एसेट्स की बिक्री रोकने की कोशिश की। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट में 22 जून 2018 को दाखिल उस एफिडेविट की कोई कॉपी नहीं मिली है, जिसे माल्या और यूबीएचएल ने दाखिल किया था। उसमें दोनों ने कहा था कि उपलब्ध एसेट्स लगभग 13900 करोड़ रुपये की हैं।

माल्या के करीबी अधिकारियों ने कहा कि वह ‘भगोड़ा’ होने का ठप्पा हटवाना चाहते हैं और भारत में अपने परिवार की कुछ प्रॉपर्टीज को बचाना चाहते हैं, जिन्हें ईडी ने जब्त कर लिया है। माल्या ने एक ईमेल में इकनॉमिक टाइम्स से कहा कि ईडी के आरोप और एसेट्स की जब्ती का आधार वह पैसा है, जो सरकारी बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंसको दिया था। माल्या ने कहा, ‘जो एसेट्स जब्त की गई हैं, वे किंगफिशर एयरलाइंस के शुरू होने से काफी पहले खरीदी गई थीं और जब्ती को जायज ठहराने के लिए उन्हें अपराध की रकम से हासिल संपत्ति नहीं कहा जा सकता है।’

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