रिफाइनिंग कंपनियां ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के साथ तटस्थ होंगी |

The Refining companies will be neutral with US sanctions on Iran

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को क्रूड ऑइल की सप्लाइ में रुकावट नहीं आएगी क्योंकि ग्लोबल मार्केट में इसकी आपूर्ति काफी है। भारत की ऑइल रिफाइनिंग कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि वे ईरान से क्रूड ऑइल खरीदने को लेकर सरकार से दिशानिर्देश का इंतजार कर रहे हैं। भारत के लिए ईरान क्रूड ऑइल का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है

ईरान से बड़ी मात्रा में ऑइल का इम्पोर्ट करने वाली एक सरकारी पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारी ने कहा, ‘अगर ईरान से सप्लाइ बंद होती है तो कोई भी कंपनी रिफाइनिंग नहीं रोकेगी।’ उन्होंने बताया कि भारतीय रिफाइनरियों के पास क्रूड ऑइल की कई वेरायटी को प्रोसेस करने की क्षमता है। अगर ईरान से सप्लाइ रुकती है तो उसकी जगह किसी अन्य देश से कच्चा तेल खरीदा जा सकता है
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि भारत और इम्पोर्ट करने वाले अन्य देशों को 4 नवंबर से ईरान से ऑइल का इम्पोर्ट पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। इसी दिन से ईरान पर पेट्रोलियम से संबंधित प्रतिबंध लागू होंगे। ट्रंप के इस बयान से भारत की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को झटका लगा था।

ईरान पर इससे पहले भी इस तरह के प्रतिबंध लग चुके हैं। हालांकि, तब भारत को इन प्रतिबंधों से छूट मिली थी और उसने ईरान से क्रूड ऑइल का इम्पोर्ट जारी रखा था। एक अन्य पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारी ने कहा, ‘यह केवल तेल कंपनियों से जुड़ा मामला नहीं है। देश को एक फैसला करना होगा।’ उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों को इस बारे में सरकार से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है, लेकिन वे इस मुद्दे को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।

भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां ईरान से क्रूड ऑइल लेना पसंद करती हैं क्योंकि उन्हें इस पर डिस्काउंट मिलता है और इसका भुगतान करने की अवधि भी अधिक होती है। इकनॉमिक टाइम्स ने 15 जून को रिपोर्ट दी थी कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भारत छूट मांगने पर विचार कर रहा है। ईरान से कच्चे तेल की सप्लाइ के लिए भारत रुपये में भुगतान करना चाहता है। इसके लिए ऐसे बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका अमेरिका से संबंध न हो। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिफाइनरी कंपनियों को बताया है कि वह 4 नवंबर से ईरान को पेमेंट में मदद नहीं करेगा।

भारतीय रिफाइनरी कंपनियां ईरान को क्रूड ऑइल के लिए भुगतान यूरो में करती हैं। भुगतान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और जर्मनी के बैंक यूरोपाइक-इरानिक हैंडलबैंक AG के जरिए किया जाता है। भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंध हाल के संबंध में कमजोर हुए हैं और ईरान पर प्रतिबंध दोनों देशों के बीच एक प्रमुख मुद्दा बन सकते हैं।

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